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 "अंजोर दल" की निर्मिति या गठन विशेष रूप से मानवाधिकार के धरती पर हुआ है । मानवाधिकार जो समाज सुधार से सहबद्ध रखता है, समाजसुधार जो सामजिक, धार्मिक, राजनीती, खेल, जातिवाद, वर्णवाद इ. से सीधा और सरल सम्बन्ध रखता है । प्रत्येक मनुष्य का मुलभुत अधिकार चाहे वो शिक्षा प्राप्त करना हो या राजनीती से सहबद्ध होके समाज परिवर्तन का विषय हो,  "अंजोर दल " इसी सभी विषयों से सम्बन्ध रखकर समाज परिवर्तन करने के लिए स्थापित हुआ है ।  विश्व के  जिव को सामाजिक अधिकार प्राप्त होने में विश्वास रखता है ।  मानवाधिकार को मुख्य धारा में रखते हुऐ प्रत्येक जिव पे शोषण का विरोध करता है और संगठित होके अपने मानवाधिकार या अन्याय , अधर्म या अनीति का स्पष्ट रूप से नकारात्मक भूमिका कानून के परिसीमन में रहकर प्रदर्शित करने मे विश्वास रखता है ।  "अंजोर दल" भारत का संविधान अपना मुख्य और प्रमुख शस्त्र समजता है ।  भारत का संविधान पर अपना सबसे ज्यादा विश्वास दर्शाता और इसी का आधार लेकर समाज परिवर्तन मे विश्वास रखता है ।  
    "अंजोर दल" किसी एक जाती या धर्म को नहीं दर्शाता , वह सभी जाती धर्मो मे विश्वास रखता है  और सभी का आदर करता है ।  "अंजोर दल" की ऐसी धारणा है की सभी धर्मो से जाती से ज्ञान प्राप्त होता है और सभी धर्म और जाती इंसानियत दर्शाती है।  इंसानियत से ही मानवाधिकार का जन्म हुआ है ।  
     "अंजोर दल" सामाजिक परिवर्तन यह अपना मुख्य धारा रखता है ।  जिसमे कोई भी धर्म या जाती को , ना केंद्रित करता है ना किसीको विरोध करता है ।  वह समाज प्रबोधन मे सबसे अधिक विश्वास रखता है । 
            "अंजोर दल" अपने आदर्श स्थान पर "छत्रपति श्री शिवाजी महाराज " इनको रखता है।  उनका आदर्श हमें यह दर्शाता है की मानवाधिकार कोई जाती धर्म से सम्बन्ध नहीं रखता बल्कि मनुष्योंकी नकारात्मक सोच से सम्बन्ध रखता है।  वह नकारात्मक सोच अमल मे लाने  के लिए नकारात्मक सोच रखनेवाला व्यक्ति किसी जाती या धर्म को अपना औजार बनता है । पर परिणामनुसार वह व्यक्ति से ज्यादा वह धर्म को या जाती को कलंकित करता है ।
      "अंजोर दल" अपने प्रेरणा स्थान पर भारतरत्न महामानव डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर जी को रखता है ।  वह इस चिज पर विश्वास रखता है की मानवाधिकार सखोलरूप से जानना हो तो डॉ.बाबासाहेब आंबेडकर जी को जानो , उन्होंने जो मानव अधिकारों के लिए किया शायद ही किसी ने उनके जैसा काम किया हो ।  आधुनिक विश्व मे उनके जैसा कोई भी व्यक्ति इस भारतभूमि पर जन्म नहीं लिया होगा , जिन्होंने मानवाधिकार के लिए अपना सम्पूर्ण जीवन अर्पित किया  होगा । 
      इसी के साथ हम दूसरे प्रेरणा स्थान पर रखते है महात्मा ज्योतिबा फुले और श्रीमती सावित्रीबाई फुले ।  जिन्होंने मानवाधिकार को स्पष्टरूप से जाना ।  शिक्षा इस अधिकार को सरलरूप से महिलाओ मे प्रस्तावित करके साक्षर महिला की नीव रखी।  
     "अंजोर दल" इस आधुनिक विश्व मे जो मुलभुत मानवाधिकार है और उसपे मानवों का जन्मसिद्ध अधिकार है इस अधिकार से कोई भी व्यक्ति वंचित नहीं रह सकता इसमें विश्वास रखता है। किसी प्रकार अगर मानवाधिकार का उल्लघन होगा कानून के दायरे मे रहकर यह दल उस मानवाधिकार के लिए अपनी भूमिका दर्शायेगा ।